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Tuesday, 26 August 2025

गणेश चतुर्थी 2025 -जाने मुहर्त,पूजा विधि ,महत्व और गणेश चतुर्थी से क्या सीखे?

 26-08-2025  गणेश चतुर्थी 2025 -जाने पूजा विधि और महत्व Ganesh chaturthi muhurat 2025 

Ganesh chaturthi kya karen

1)गणेश चतुर्थी पूजा की संक्षिप्त विधि ganesh chaturthi mein kya kya saman lagta hai

स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।एक चौकी पर पीला/लाल कपड़ा बिछाएं और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।मूर्ति पर जल, फूल और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से उनका स्नान कराएं।लाल चंदन का तिलक लगाएं और ताजे फूल व दूर्वा (3 या 5 गाँठ) चढ़ाएं।मोदक, लड्डू आदि का भोग (प्रसाद) लगाएं।धूप-दीप दिखाकर आरती करें।प्रसाद सबको बांटें।                                     गणेश चतुर्थी का महत्व ham ganesh chaturthi kyon banate hain

1. ) गणेश जी को विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाला) और मंगलमूर्ति (शुभता का प्रतीक) माना जाता है। उनकी पूजा से सभी कार्य बिना बाधाओं के पूरे होते हैं    2) किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत (जैसे व्यापार, विवाह, शिक्षा) में गणेश जी की पूजा की जाती है, क्योंकि वे प्रथम पूज्य देवता हैं।     

3) गणेश जी का जन्म भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र के रूप में हुआ था। उन्हें शिवजी द्वारा प्रथम पूज्य का वरदान मिला, इसलिए हर शुभ कार्य में सबसे पहले उन्हीं की पूजा की जाती है।

4) यह त्योहार लोगों को एक साथ लाता है। बड़े-बड़े पंडालों में सामूहिक पूजा, भजन और आरती का आयोजन होता है।

5) मूर्ति निर्माण, सजावट, संगीत और नृत्य जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से इस त्योहार की रौनक बढ़ती है।

aaj ganesh chaturthi ka muhurat
Why is Ganesh Chaturthi celebrated for 10 days in 2025?

गणेश चतुर्थी से क्या सीखे? 1. गणेश जी को विद्या और बुद्धि का देवता माना जाता है।सीख: जीवन में हर समस्या का समाधान बुद्धि और विवेक से करें, जल्दबाजी न दिखाएं।

2. अड़चनों को हटाने की सकारात्मक सोच (Positivity to Remove Obstacles)गणेश जी विघ्नहर्ता हैं, यानी वे बाधाओं को दूर करते हैं।सीख: जीवन में आने वाली बाधाओं से घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें दूर करने का साहस और धैर्य रखें।

3. विनम्रता और आदर (Humility and Respect)गणेश जी ने अपने माता-पिता (शिव और पार्वती) की आज्ञा का पालन किया और उनका सम्मान किया।सीख: बड़ों का आदर करें और विनम्र बने रहें।4. अपूर्णता में भी सुंदरता (Beauty in Imperfection)गणेश जी का शरीर मनुष्य का है, लेकिन सिर हाथी का है, फिर भी वे पूज्यनीय हैं।सीख: शारीरिक या अन्य कमियों को कभी अपनी सफलता में बाधा न बनने दें।

5. सही और गलत का निर्णय (Ability to Decide Right & Wrong)गणेश जी ने अपना दांत तोड़कर महाभारत लिखी थी, क्योंकि उन्होंने धर्म और सत्य को महत्व दिया।सीख: हमेशा सही निर्णय लें, चाहे उसके लिए त्याग ही क्यों न करना पड़े।

6. प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण (Protecting Nature)आज ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का प्रचलन बढ़ा है।सीख: प्रकृति की रक्षा करें और पर्यावरण को साफ-सुथरा रखें।7. आडंबरहीन जीवन (Simple Living)गणेश जी का वाहन एक छोटा सा मूषक (चूहा) है।सीख: ऐश्वर्य और दिखावे से दूर, सादगीपूर्ण जीवन जीएं।

8. अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा (Discipline & Dedication)गणेश जी ने महाभारत लिखते समय बिना रुके लगातार कार्य किया।

सीख: लक्ष्य के प्रति समर्पित और अनुशासित रहें।

गणेश चतुर्थी की कहानी: 

माता पार्वती की सृजनात्मक प्रेरणा एक बार की बात है, जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने अपने निवास स्थान के बाहर किसी को पहरा देने के लिए एक सहायक की आवश्यकता महसूस की। उस समय भगवान शिव और उनके गण (सहायक) वहाँ उपस्थित नहीं थे।तब माता पार्वती ने एक विचार सोचा। उन्होंने स्नान करने से पहले अपने शरीर से उबटन (सुगंधित पेस्ट) निकाला और उससे एक पुतला बना दिया। अपनी दिव्य शक्ति से उन्होंने उस पुतले में जान डाल दी।यह पुतला एक सुंदर, तेजस्वी और हृष्ट-पुष्ट बालक के रूप में परिवर्तित हो गया। माता पार्वती ने उस बालक से कहा, "हे पुत्र! मैं स्नान करने जा रही हूँ। तुम इस द्वार की रक्षा करो और किसी को भी अंदर मत आने देना।"बालक ने विनम्रतापूर्वक सिर झुकाकर अपनी माता की आज्ञा का पालन करने का वचन दिया और द्वार पर पहरा देने लगा।

भगवान शिव और बालक का टकराव 

कुछ ही समय बाद, भगवान शिव वहाँ लौटे और अपने निवास में प्रवेश करना चाहा। तभी उस युवा बालक ने उन्हें रोक दिया और कहा, "माता जी ने किसी को भी अंदर आने से मना किया है। आप अंदर नहीं जा सकते।"भगवान शिव हैरान रह गए। यह बालक उन्हें पहचानता क्यों नहीं? उन्होंने बालक से कहा, "हे बालक, यह तो मेरा ही निवास है। मुझे रोकने की आवश्यकता नहीं है।"लेकिन बालक अपनी माता की आज्ञा से एक इंच भी नहीं हटा। उसने दृढ़ता से कहा, "मैंने अपनी माता का आदेश प्राप्त किया है और मैं उसका पालन करूंगा। आप अंदर नहीं जा सकते।"यह सुनकर भगवान शिव को क्रोध आ गया। उनके और बालक के बीच विवाद बढ़ता गया और बात युद्ध तक पहुँच गई। बालक अत्यंत शक्तिशाली था और उसने शिव के सभी गणों (सहायकों) को परास्त कर दिया।अंत में, भगवान शिव के क्रोध ने प्रलय का रूप ले लिया और उन्होंने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया।

माता पार्वती का क्रोध और समाधान 

जब माता पार्वती ने बाहर आकर यह दृश्य देखा कि उनके पुत्र का सिर धड़ से अलग है और वह मृत पड़ा है, तो उनका दुःख अथाह क्रोध में बदल गया। उनका शोक इतना भयानक था कि पूरा ब्रह्मांड कांपने लगा। उन्होंने संहार शुरू करने की ठान ली।भगवान शिव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने माता पार्वती को शांत करने का प्रयास किया और वादा किया कि वे उनके पुत्र को जीवित कर देंगे।भगवान शिव ने तुरंत अपने गणों को आदेश दिया, "उत्तर दिशा में जाओ और सबसे पहले मिलने वाले किसी भी जीव का सिर काटकर ले आओ, जो अपनी माँ की तरफ पीठ करके सो रहा हो।"गण उत्तर दिशा में गए और उन्हें एक हाथी (गज) का बच्चा दिखाई दिया, जो अपनी माँ की ओर पीठ करके सो रहा था। उन्होंने उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर भगवान शिव के पास ले आए।भगवान शिव ने उस हाथी के सिर को बालक के धड़ पर रखा और अपनी दिव्य शक्ति से उसे पुनर्जीवित कर दिया। इस प्रकार, वह बालक एक नए रूप में जीवित हो गया – मानव शरीर के साथ हाथी का सिर।भगवान शिव ने उस बालक को न केवल जीवनदान दिया, बल्कि उसे अमरत्व का वरदान देते हुए घोषणा की कि सभी देवताओं और मनुष्यों में सबसे पहले उसी की पूजा की जाएगी। उन्होंने उसका नाम गणेश रखा, जिसका अर्थ है - 'गणों (शिव के सेवकों) का स्वामी'।माता पार्वती प्रसन्न हुईं और इस प्रकार भगवान गणेश का जन्म हुआ।

गणेश चतुर्थी मनाने का कारण

गणेश चतुर्थी का त्योहार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।बुद्धि और समृद्धि के देवता: गणेश जी को विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले), बुद्धि और ज्ञान के देवता माना जाता है। कोई भी नया कार्य शुरू करने से पहले उनकी पूजा की जाती है।पूजा की शुरुआत: उनकी यह कहानी इस बात की पुष्टि करती है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में सबसे पहले गणपति की पूजा करनी चाहिए, ताकि सभी बाधाएँ दूर हो जाएँ और कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो।10 दिवसीय उत्सव: लोग 10 दिनों तक उत्सव मनाते हैं और अंतिम दिन (अनंत चतुर्दशी) को गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन करते हैं। यह हमें जीवन की अनंत प्रकृति और आने-जाने के चक्र का स्मरण कराता है

 

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