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Tuesday, 5 May 2026

 



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मस्त शायरी

  मोटीवेशनल शायरी  परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है  ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है मिला है हुस्न तो इस हुस्न की हिफ़ाज़त कर  सँभल के ...