फालतू चीज़ों को निकाल फेंकिए, डिलीट मारिए...
एकांत में बैठकर सोचिए, कॉपी-पेन लीजिए, एक लिस्ट बना डालिए... किस भय ने आपको जकड़ रखा है, कौन सी बात आपको ताकत देती है, तब आप पाएँगे कि कितने डर तो व्यर्थ ही थे, जिनका अब कोई वजूद ही नहीं, फिर भी वो पुराने सामान की तरह मन की ताक पर सजे बैठे हैं! तुरंत उनको निकल फेंकिए, जैसे घर में पड़े हुए कबाड़ को समय-समय पर खाली करना जरूरी है, ठीक वैसे ही दिमाग की सफाई भी बेहद जरूरी है।
कितने ही लोग ऐसे होंगे, जो सिर्फ एक दर्द, बोझ की तरह आपकी जिंदगी में शामिल होंगे, जिनका काम सिर्फ आपको आहत करने, नीचा दिखाने का ही होगा... निकाल फेंकिए, डिलीट मारिए, कोशिश कीजिए कि दो ही सूरतों में लोगों को जीवन में शामिल किया जाए।
एक-वो आपके काम के हों और दूसरा - उनके साथ आपको अच्छा लगता हो, कुछ नया सीखने को मिलता हो ।
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