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Wednesday, 22 April 2026

 न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए,
तिरा वजूद है अब सिर्फ़ दास्ताँ के लिए,,
ग़रज़-परस्त जहाँ में वफ़ा तलाश न कर,
ये शय बनी थी किसी दूसरे जहाँ के लिए।
(साहिर लुधियानवी)
👉🏻ग़रज़-परस्त= मतलबी,Selfish

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