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Wednesday, 22 April 2026

 हम ग़ज़ल में तिरा चर्चा नहीं होने देते 
तेरी यादों को भी रुस्वा नहीं होने देते 
कुछ तो हम ख़ुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी 
और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते
 
आज भी गाँव में कुछ कच्चे मकानों वाले 
घर में हम-साए के फ़ाक़ा नहीं होने देते 
मुझ को थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़ 
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते

(हम साए Neighbour)
फाका ( , starvation) भूखे मरना 

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